उत्तराखंड में रुद्राक्ष खेती क्रांति की शुरुआत होने जा रही है। प्रदेश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रेरणा से राज्य बनेगा प्रमुख उत्पादन हब होने जा रहा है।विधायक टिहरी गढ़वाल श्री किशोर उपाध्याय जी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने, दुनिया में रुद्राक्ष के अग्रणी उत्पादक नेपाल का दौरा किया। इस प्रतिनिधिमंडल में श्री किशोर उपाध्याय के साथ विख्यात रुद्राक्ष विशेषज्ञ प्रिंस अग्रवाल तथा वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एवं जाने-माने आध्यात्मिक लेखक डॉ. रमेश सिंह पाल सम्मिलित थे।

इस अध्ययन भ्रमण का उद्देश्य नेपाल में रुद्राक्ष की खेती की उन्नत पद्धतियों, कृषि प्रबंधन, कटाई उपरांत प्रसंस्करण प्रणाली, विपणन तंत्र, मृदा की विशेषताओं तथा उत्तराखण्ड के उपयुक्त क्षेत्रों में रुद्राक्ष की व्यावसायिक खेती की संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन करना था। नेपाल के विभिन्न रुद्राक्ष उत्पादायी खेतो की मिट्टी के नमूने एकत्र कर, उनका प्रयोगशाला में मृदा परीक्षण किया गया।

तदोपरांत गढ़वाल क्षेत्रो के विभिन्न स्थानों जैसे टिहरी गढ़वाल, नरेंद्रनगर, ऋषिकेश, हरिद्वार, देहरादून इत्यादि स्थानों की मिट्टी की जाँच कर, यह पता चला कि नेपाल के रुद्राक्ष उत्पादायी खेतो की मिट्टी तथा गढ़वाल के कई स्थानों की मिट्टी आपस में काफी हद तक मेल खाती है। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ रमेश सिंह पाल ने अध्ययन के दौरान प्राप्त अनुभवों एवं निष्कर्षों से वह बताया कि उत्तराखण्ड में रुद्राक्ष आधारित एक सुदृढ़ एवं टिकाऊ पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की अत्यंत व्यापक संभावनाएँ विद्यमान हैं।


भारत एवं चीन में मिलने वाले रुद्राक्ष ज्यादातर नेपाल और इंडोनेशिया से आयत किये जाते है और ये आयात भारत में सालाना कई सौ करोड़ का है।


प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ रमेश सिंह पाल विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत हैं तथा आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े हैं। उन्होंने आध्यात्मिक क्षेत्र में अनेक पुस्तकें लिखी हैं। डाक्टर रमेश सिंह पाल ने बताया कि उनका नैपाल क्षेत्र का दौरा रुद्राक्ष खेती में शीध्र ही उत्तराखंड में मील का पत्थर साबित होगा।

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