गरमपानी। विश्व प्रसिद्ध बाबा नीब करौरी महाराज के पावन धाम ‘कैंची धाम’ में इन दिनों आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। लेकिन इस भक्ति के साथ-साथ भक्तों और स्थानीय लोगों को जिस मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है, वह है भीषण ट्रैफिक जाम। होली के त्यौहार के बाद शुरू हुआ यह सिलसिला अब व्यापारियों और राहगीरों के लिए गले की फांस बन गया है।

हैरानी की बात यह है कि सीजन की अभी शुरुआत ही हुई है और आलम यह है कि सुबह 6:00 बजे से ही भवाली-अल्मोड़ा हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग जा रही हैं। वीकेंड हो या कोई त्यौहार, कैंची धाम में पैर रखने की जगह नहीं मिल रही है। जाम का सबसे बुरा असर गरमपानी, खैरना और छड़ा जैसे नजदीकी बाजारों पर पड़ रहा है।

जाम की वजह से सबसे ज्यादा आक्रोश स्थानीय व्यापारियों में है। व्यापारियों का कहना है कि:
- ग्राहकों की पहुंच से बाहर: सड़क पर घंटों जाम लगे रहने के कारण यात्री और पर्यटक बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
- आर्थिक नुकसान: सीजन की शुरुआत में ही व्यापार ठप पड़ा है। दुकानदारों को डर सता रहा है कि यदि यही स्थिति रही तो वे दुकानों और वाहनों की बैंक किस्त (EMI) तक नहीं निकाल पाएंगे।
- खोकले वादे: प्रशासन द्वारा शटल सेवा और पार्किंग के जो बड़े-बड़े दावे किए गए थे, वे धरातल पर पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन जाम से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बना पा रहा है। बाईपास का काम अभी भी अधूरा है और शिप्रा नदी पर पुल की सुस्त रफ्तार ने कोढ़ में खाज का काम किया है। जब तक प्रशासन सख्त ट्रैफिक मैनेजमेंट और वैकल्पिक मार्गों को सुचारू नहीं करता, तब तक कैंची धाम की यह डगर व्यापारियों और यात्रियों के लिए मुसीबत भरी ही बनी रहेगी।


















