( उत्तराखंड जनसरोकार से जुड़े गिर्दा के रचित गीतों को गा करश्रद्धांजलि अर्पित की, जगह जगह आयोजन)

उत्तराखंड के जन सरोकारों से जुड़े जनकवि गिर्दा की पुण्यतिथि पर समूचे उत्तराखंड में कार्यक्रम आयोजित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर गिर्दा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान को याद किया।
वक्ताओं ने कहा कि गिर्दा ने अपनी कविताओं, गीतों और जनगीतों के माध्यम से उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति, प्रकृति, पहाड़ की पीड़ा तथा आम जनता के संघर्षों को आवाज दी। उन्होंने अपने लेखन को केवल साहित्य तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सामाजिक चेतना और जन आंदोलनों से भी जोड़ा।
वक्ताओं ने कहा कि गिर्दा की रचनाएं आज भी पहाड़ के सामाजिक सरोकारों और जनभावनाओं को स्वर देती हैं। उनका साहित्य नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। जगह जगह कार्यक्रम आयोजित कर गिर्दा के उत्तराखंड के जन सरोकारों को लेकर रचित गीत , जो आज भी वक्त की आवाज है, को गा गाकरश्रद्धांजलि अर्पित करने का सिलसिला जारी रहा। लोगों ने गिर्दा के विचारों और जनपक्षधर साहित्य को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया तथा उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी‌

गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ का जन्म 10 सितंबर 1942 को अल्मोड़ा जिले के ज्योली गांव में हुआ था। कविता, गीत, रंगमंच और जनसरोकारों से उनका गहरा जुड़ाव रहा। उनकी रचनाओं में उत्तराखंड के पहाड़, गांव, जंगल, नदियां, पलायन, सामाजिक असमानता और आम लोगों के सवाल प्रमुख रूप से सामने आते हैं।
गिर्दा ने उत्तराखंड के सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी की। 1970 और 1980 के दशक के वन आंदोलनों से लेकर उत्तराखंड राज्य आंदोलन तक उनके गीत और कविताएं आंदोलनों में गूंजती रहीं। ‘आज हिमाले तुमन कै धत्यूँछो’, ‘जैंता एक दिन तो आलो’ और ‘हम लड़ते रया भुला’ उनकी चर्चित रचनाओं में शामिल हैं।
उनकी भाषा आम बोलचाल की थी और उनकी रचनाएं पहाड़ के सामाजिक जीवन से सीधे जुड़ी थीं। इसी कारण उनके गीत उत्तराखंड के जनआंदोलनों और सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा बने।22 अगस्त 2010 को गिर्दा का निधन हुआ। आज भी उनके गीत उत्तराखंड के जल, जंगल, जमीन, पलायन और पहाड़ के भविष्य से जुड़े सवालों के संदर्भ में सुने और याद किए जाते हैं।
अल्मोड़ा में गिरीश तिवारी गिर्दा के साथ जन नायक डाक्टर शमशेर सिंह बिष्ट द्वारा स्थापित उत्तराखंड लोक वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने, रंगकर्मी वरिष्ठ पत्रकार नवीन बिष्ट के नेतृत्व में सभा कर गिरीश तिवारी गिर्दा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

ADVERTISEMENTS Ad