(* समाज में फैले अंधविश्वास विज्ञान साक्षरता से ही दूर हो सकते हैं।
** हमें कैसा उत्तराखंड चाहिए?
***नशामुक्त युवा वर्ग
****विषयों पर व्याख्यान प्रतियोगिता आयोजित हुयी।)

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के साप्ताहिक कार्यक्रम की कड़ी में समता ,भारत ज्ञान विज्ञान समिति, अल्मोड़ा तथा ग्रामीण महिला जागृति संस्था,सरकार की आली ,हवालबाग विकास खंड अल्मोड़ा के संयुक्त तत्वावधान में नागरिक शिक्षा केंद्र ,सरकार की आली में कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती पारू उप्रेती द्वारा की गई।सर्वप्रथम भारत ज्ञान विज्ञान समिति अल्मोड़ा की जिलाध्यक्ष प्रोफेसर विजया ढौंडियाल द्वारा अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के विषय में जानकारी प्रदान करते हुए कहा कि समिति प्रतिवर्ष 8सितंबर से 15सितंबर तक जनपद के विभिन्न स्थानों में साप्ताहिक कार्यक्रम आयोजित करती है ।उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम 1966में यूनेस्को के 14सम्मेलन में इस दिवस को मनाने की घोषणा की गई तथा 8 सितंबर 1967 को समावेशी, शांतिपूर्ण तथा सतत समाज के निर्माण में साक्षरता के महत्व के विस्तार हेतु इस दिवस का आयोजन प्रारंभ हो गया। तमाम प्रयासों के बाद भी सन 2024 तक विश्व लगभग 73.9%करोड़ युवसुर वयस्क बुनियादी साक्षरता कौशल से वंचित हैं तथा 2023 के आंकड़ों के अनुसार लगभग 27.2% करोड़ बच्चे विद्यालयों से बाहर हैं ।2026 में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की थीम लोगों, पृथ्वी और समृद्धि के लिए साक्षरताहै ।भारत ज्ञान विज्ञान समिति इन्हीं उद्देश्यों को पूरा करने हेतु नागरिक शिक्षा केंद्रों के माध्यम और जनसहयोग से कार्यभार रही है।समिति के प्रांतीय उपाध्यक्ष श्री प्रमोद तिवारी ने नागरिक शिक्षा केंद्रों की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए महिला समूहों की सहभागिता के महत्व को बताते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में समूह महिला विकास में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। युवाओ ,महिलाओं , बच्चों तथा किशोरी बालिकाओं के मध्य आजीवन शिक्षा के कार्यक्रमों का आयोजन भारत ज्ञान विज्ञान समिति अल्मोड़ा द्वारा सतत् रूप से किया जा रहा है ।कार्यक्रम में आज हमें कैसा उत्तराखंड चाहिये तथा अंध विश्वास को कैसे दूर करेंविषय पर प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमें प्रथम स्थान गीता नेगी उन्नति समूह, द्वितीय- इंदु आर्या मनसा समूह,तृतीय मीना भट्ट -मां नंदा समूह, चतुर्थ देवकी रावतउन्नति समूह,पंचम – ममता तिवारी जागृति संस्था ने प्राप्त किया ।प्रतिभागियों ने कहा कि सर्वप्रथम शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक बदलाव की आवश्यकता है।स्वास्य सेवाएं अंतिम और आम जन तक पहुंचनी चाहिए।अस्पताल में आवश्यक व्यवस्था नहीं है।समाज में नशे की प्रवृति गंभीर हो गयी है बच्चे भी नशे की पकड़ में आ रहे है ।स्वच्छता कार्यक्रम को सघन रूप से देखने की आवश्यकता है ।अंधविश्वास को दूर करने हेतु वैज्ञानिक चेतना के प्रसार की आवश्यकता है ।महिलाओं के मध्य महिला समूहों को और अधिक सक्रियता से कार्य करने की जरूरत है।अपने अध्यक्षीय संबोधन में ग्राम प्रधान श्रीमती पारू उप्रेती उपाध्यक्ष ग्रामीण महिला जागृति संस्था ,ने कहा कि नागरिक शिक्षा केंद्रों के माध्यम से ग्राम और जन विकास का कार्य गंभीरता से किया जाएगा।निकट भविष्य में समूह की कार्यशाला आयोजित कर कार्यक्रम बनाए जाएंगे। कार्यक्रम में एकता , लक्ष्मी,जय नंदा, उज्वलाजयगोलू,समृति,उन्नति,मनसा,दीपालय,आदि महिला समूहों की महिलाओं ने प्रतिभाग किया।कार्यक्रम का संचालन ग्रामीण महिला जागृति संस्था की सचिव धर्मा बंगारी ने किया।कार्यक्रम में प्रेमाकिरमोलिया,अलका,रजनी, इंदू,संगीता,ममता तिवारी,स्नेहा,सुषमा,ममता भट्ट ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये।निर्णायक मंडल में महिला जागृति संस्था के सदस्य चित्रा कांडपाल,तथा सरस्वती आर्य थे ।

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