राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के सदस्य डॉ अफरोज अहमद ने अल्मोड़ा पहुंचकर जिला पर्यावरण प्लान, पर्यावरण संरक्षण, नदी संरक्षण और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। अफरोज अहमद ने कहा कि पर्यावरण हम सबकी साझी विरासत है। इसका संरक्षण केवल एनजीटी, जिला प्रशासन या सरकार का ही नहीं, बल्कि यह जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और आर्थिकी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। हमें इकोनॉमी से बढ़कर इकोलॉजी को महत्व देना चाहिए। जब हमारा पर्यावरण संतुलित रहेगा तभी हमारी इकोनॉमी बूस्ट होगी।

पहाड़ की खूबसूरती नदियों, झरनों, तालाबों और स्वच्छ वातावरण से है, इसलिए इनके सरक्षण के लिए हमें मिलजुलकर कार्य करना होगा। उन्होंने जिला प्रशासन को कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। नदियों के फ्लड प्लेन जोनों का चिन्हीकरण किया जाए तथा नदियों के कैचमेंट एरिया में अधिक से अधिक पौधारोपण करें। नदियों में बहने वाले जल के स्रोत हरे भरे जंगल होते हैं, इसलिए नदियों के कैचमेंट एरिया में जंगलों को विकसित करना बहुत जरूरी है।इस मौके पर जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने जनपद में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, नदी संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाए जा रहे कदमों का विवरण प्रस्तुत किया।

जिलाधिकारी ने डॉ अफरोज अहमद को बताया कि नदियों के संरक्षण की दिशा में जटा गंगा पुनर्जीवन प्लान तैयार किया गया है। इसके संरक्षण के लिए जिला प्रशासन संवेदनशील
बैठक के पश्चात डॉ अफरोज अहमद ने कलेक्ट्रेट परिसर में पौधारोपण किया तथा सभी से अधिक से अधिक पौधे लगाने का आव्हान किया बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर घोड़के, प्रभागीय वनाधिकारी दीपक सिंह, प्रदीप धौलाखंडी, मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा, अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्र, जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण संस्थान के विषय विशेषज्ञ, प्रो0 जे एस रावत तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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