उत्तराखंड: उत्तराखंड की पृष्ठभूमि पर बनी बहुचर्चित फिल्म ‘Pyre’ (चिता) के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक विनोद कापड़ी ने सिनेमाघरों के भीतर मोबाइल से फिल्म की रिकॉर्डिंग करने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। थिएट्रीकल रिलीज के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (X और Facebook) के माध्यम से एक अपील जारी करते हुए उन्होंने चेतावनी दी है कि हॉल के अंदर फिल्म के किसी भी हिस्से को रिकॉर्ड करना, शेयर करना या सर्कुलेट करना कानूनन अपराध और कॉपीराइट उल्लंघन (पाइरेसी) की श्रेणी में आता है।

निर्देशक की मुख्य अपील और चेतावनियाँ:

  • गंभीर कानूनी कार्रवाई: सिनेमाघरों के भीतर अनधिकृत (unauthorised) रिकॉर्डिंग करते हुए पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त सिविल और क्रिमिनल कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
  • फुटेज डिलीट करने की अपील: विनोद कापड़ी ने दर्शकों से आग्रह किया है कि वे हॉल के अंदर रिकॉर्डिंग करने से बचें। यदि किसी दर्शक ने पहले से ही कोई फुटेज रिकॉर्ड या सोशल मीडिया पर अपलोड की है, तो उसे तुरंत डिलीट कर दें।
  • कलाकारों की मेहनत और निजता का सम्मान: निर्देशक ने कहा कि इस तरह की रिकॉर्डिंग न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि फिल्म से जुड़े कलाकारों की निजता और उनके अथक परिश्रम का भी अनादर है।
  • रिव्यू शेयर करने का सही तरीका: उन्होंने दर्शकों से अपील की है कि वे सिनेमाघर के बाहर लगे पोस्टर्स या बैनर्स के साथ अपनी तस्वीर क्लिक कर सोशल मीडिया पर फिल्म का रिव्यू साझा करें, लेकिन हॉल के भीतर कैमरे का प्रयोग बिल्कुल न करें।

पलायन और बुजुर्गों के दर्द की संवेदनशील कहानी

‘Pyre’ उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों से लगातार हो रहे पलायन, वहां पीछे छूट गए बुजुर्गों के अकेलेपन, उनके आपसी प्रेम और संघर्ष पर आधारित एक बेहद संवेदनशील और मार्मिक फिल्म है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सराहना बटोरने के बाद, घरेलू सिनेमाघरों में भी दर्शकों द्वारा इस फिल्म को काफी प्यार और प्रतिक्रिया मिल रही है।

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