वनों में आग लगाने में लिप्त लोगों को जिलाधिकारी अलमोडा़ अंशुल सिंह ने खुले शब्दों में कहा वनाग्नि में लिप्त लोगों की खैर नहीं। लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही शुरू हो गई है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर आज जनपद के विभिन्न पुलिस थाना क्षेत्रों में वनाग्नि की घटनाओं के संबंध में कुल 05 प्राथमिकी रिपोर्ट (थाना सल्ट , रानीखेत, चौखुटिया, द्वाराहाट तथा भत्राेजखान) में अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध दर्ज की गई हैं।
इन एफआईआर का उद्देश्य जंगलों में आग लगाने वाले असामाजिक एवं शरारती तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने कहा कि वनाग्नि केवल जंगलों तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण, वन्यजीवों, जैव विविधता, जल स्रोतों तथा मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा है। जंगलों में लगने वाली आग से प्राकृतिक संपदा को अपूरणीय क्षति पहुंचती है तथा स्थानीय लोगों की आजीविका भी प्रभावित होती है।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जानबूझकर अथवा लापरवाहीवश जंगलों में आग लगाने वालों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे तत्वों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन एवं वन विभाग द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है तथा संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है।जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि जंगलों के आसपास बीड़ी, सिगरेट अथवा अन्य जलती सामग्री न फेंकें तथा सूखी घास, पत्तियों अथवा कूड़े में आग लगाने से बचें। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-बाड़ी एवं घास कटान के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। यदि कहीं भी वनाग्नि की सूचना मिले तो तत्काल वन विभाग, पुलिस अथवा प्रशासन को सूचित करें। साथ ही स्वयं भी सक्रिय योगदान दें।जिलाधिकारी ने कहा कि फॉरेस्ट फायर को रोकना केवल सरकारी तंत्र की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह आम जनमानस का भी सामूहिक दायित्व है। जब तक समाज के प्रत्येक व्यक्ति का सहयोग और जागरूकता इसमें शामिल नहीं होगी, तब तक वनाग्नि पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। सभी नागरिकों की सहभागिता एवं सतर्कता से ही जंगलों को सुरक्षित रखा जा सकता है।प्रभागीय वनाधिकारी दीपक सिंह ने कहा कि फॉरेस्ट फायर को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग लगातार सक्रियता बनाए हुए है। इस पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जन सहभागिता बहुत जरूरी है।

















