रामनगर। कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटे रामनगर वन प्रभाग में बाघ का खौफ थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार शाम रामनगर वन प्रभाग की कोटा रेंज के अंतर्गत पाटकोट क्षेत्र के भलोन गांव में बाघ ने एक श्रमिक पर हमला कर उसे अपना निवाला बना लिया। इस दर्दनाक घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत व्याप्त है और ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

काम से लौटते समय हुआ हमला

​मृतक की पहचान बिहार निवासी एक श्रमिक के रूप में हुई है, जो भलोन क्षेत्र में चल रहे पानी की पाइपलाइन बिछाने के कार्य के लिए यहां आया हुआ था। जानकारी के अनुसार, उक्त श्रमिक क्षेत्र के पूर्व प्रधान मनमोहन पाठक की गौशाला में कार्यरत था और साथ ही पाइपलाइन फिटिंग का काम भी देख रहा था।

​रविवार शाम लगभग 7:00 बजे, जब वह अपने कार्य में व्यस्त था, तभी घात लगाकर बैठे बाघ ने उस पर अचानक हमला बोल दिया। बाघ श्रमिक को गर्दन से दबोचकर झाड़ियों की ओर खींच ले गया। चीख-पुकार सुनकर जब तक लोग मौके पर पहुंचे, तब तक बाघ श्रमिक को काफी दूर ले जा चुका था। कुछ देर बाद तलाशी लेने पर घटनास्थल से कुछ दूरी पर श्रमिक का लहूलुहान शव बरामद हुआ।

वन विभाग की कार्रवाई और अलर्ट

​घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। मुख्य वन संरक्षक डॉ. साकेत बडोला ने घटना की पुष्टि करते हुए दुख व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि बाघ की हलचल को देखते हुए आसपास के गांवों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है और सुरक्षा की दृष्टि से सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अकेले जंगलों की ओर न जाने और शाम के समय सतर्क रहने की अपील की है।

स्थायी समाधान की मांग और भारी रोष

​इस घटना ने स्थानीय निवासियों के धैर्य का बांध तोड़ दिया है। राज्य आंदोलनकारी अध्यक्ष नवीन नैनवाल ने सरकार और वन विभाग को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष चरम पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल मुआवजा बांटकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रही है, जबकि बाघों के बढ़ते हमलों को रोकने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि आदमखोर हो चुके इस बाघ को तुरंत पकड़ा जाए या उसे मारने के आदेश जारी किए जाएं ताकि लोग सुरक्षित महसूस कर सकें।

दहशत के साये में ग्रामीण

​भलोन और आसपास के पाटकोट क्षेत्रों में लोग अब घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते बाघ को नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में और भी बड़ी जनहानि हो सकती है। फिलहाल, पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और वन विभाग बाघ की लोकेशन ट्रैक करने के लिए कैमरे लगाने की तैयारी कर रहा है।

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