( मांगें पूरी न होने पर उच्च न्यायालय उत्तराखंड नैनीताल में पेश की जायेगी जन हित याचिका। विनोद तिवारी)

जनपद अल्मोड़ा के खूंट–धामस क्षेत्र सहित विभिन्न गांवों से आए पीड़ित ग्रामीणों एवं नागरिकों द्वारा भूमि माफिया गतिविधियों, अवैध भूमि क्रय-विक्रय, गोलखाता भूमि की धोखाधड़ीपूर्ण रजिस्ट्री, अवैध खनन एवं गंभीर पर्यावरणीय क्षति के विरुद्ध एक विस्तृत ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया।यह ज्ञापन अधिवक्ता उच्च न्यायालय विनोद चंद्र तिवारी के नेतृत्व में दिया गया। मौके पर उप जिलाधिकारी अल्मोड़ा श्री संजय कुमार उपस्थित रहे, जिन्होंने ज्ञापन प्राप्त किया। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह बिष्ट सहित अनेक पीड़ित ग्रामीण उपस्थित रहे।

ज्ञापन के माध्यम से मुख्य आरोप एवं मुद्दे कुछ इस प्रकार रहे:-

  1. भूमि माफिया द्वारा किसानों का शोषण
    आरोप लगाए गए हैं कि पिछले 10–15 वर्षों में किसानों से उनकी पुश्तैनी भूमि औने-पौने दामों में दबाव, भय और धोखाधड़ी से खरीदी गई तथा बाद में बाहरी लोगों को भारी कीमतों पर बेची गई।
  2. गोलखाता (संयुक्त खातेदारी) भूमि की अवैध रजिस्ट्री
    पूरे जनपद अल्मोड़ा में गोलखाता भूमि में एक या दो खातेदारों से मिलीभगत कर संपूर्ण भूमि की रजिस्ट्री कर दी गई, जबकि अन्य खातेदारों की सहमति नहीं ली गई। यह राजस्व कानूनों का गंभीर उल्लंघन है।
  3. उत्तराखंड भू-कानून का उल्लंघन
    2025 में संशोधित उत्तराखंड भू-कानून के बावजूद बाहरी व्यक्तियों द्वारा कृषि/उद्यान भूमि की खरीद-फरोख्त कराई गई, जिसकी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
  4. अवैध खनन एवं प्राकृतिक संसाधनों की लूट
    आरोप है कि बिना अनुमति खेतों, गधेरों और निजी भूमि से पत्थर व अन्य खनिज निकाले गए, जिससे भूमि, जलस्रोत और ग्रामीणों की संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचा।
  5. पर्यावरण एवं वन कानूनों का खुला उल्लंघन
    माँ श्यामा देवी जंगल क्षेत्र सहित कई संवेदनशील इलाकों में अवैध रिजॉर्ट व निर्माण कर पेड़ कटान किया गया। ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन नहीं होने से पर्यावरण और जैव विविधता को खतरा उत्पन्न हुआ।
  6. धमकी, गाली-गलौज और सामाजिक उत्पीड़न
    भूमि न बेचने वाले ग्रामीणों को धमकाने, गाली-गलौज करने, सामाजिक बहिष्कार और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हैं।
  7. संगठित गिरोह (गैंग) की भूमिका
    आरोप हैं कि कुछ भूमाफियाओं ने गांवों में गिरोह बना रखे हैं, जिनका उपयोग डराने-धमकाने और अवैध गतिविधियों के लिए किया जाता है।
  8. संपत्ति की जांच की मांग
    ज्ञापन में मांग की गई कि आरोपित व्यक्तियों की चल-अचल संपत्तियों, आय के स्रोतों एवं भूमि सौदों की गहन जांच कराई जाए।

प्रमुख नाम जिन पर आरोप लगाए गए हैं (जांच की मांग)

ज्ञापन में आरोप लगाए गए हैं कि मोहन सिंह, मुकेश रौतेला, हीरा सिंह सहित अन्य व्यक्तियों द्वारा भारी मात्रा में भूमि खरीदी गई। विशेष रूप से मोहन सिंह के विरुद्ध ग्रामीणों द्वारा धमकी एवं दबाव से जुड़े आरोप सार्वजनिक रूप से लगाए गए हैं, जिनसे संबंधित वीडियो भी सामने आने की बात कही गई है।
पीड़ितों ने मांग की है कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच हो तथा आवश्यक होने पर गैंगस्टर एक्ट एवं राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कानूनों के तहत भी कार्रवाई पर विचार किया जाए।

प्रमुख पीड़ित जिनके मामले ज्ञापन में शामिल

बasant बल्लभ पंत, ग्राम खूंट

प्रमोद पंत, ग्राम खूंट

भोपाल सिंह बिष्ट, ग्राम धामस

डूंगर सिंह बिष्ट, ग्राम धामस

संतोष सिंह बिष्ट, ग्राम धामस
(सहित अन्य ग्रामीण पीड़ित)

चेतावनी

पीड़ित नागरिकों एवं अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन द्वारा शीघ्र, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच प्रारंभ नहीं की गई, तो वे माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर करने के लिए बाध्य होंगे।

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